Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #438

गुरु · Guru

तू तू करूं तो निकट है, दुर-दुर करू हो जाय। जों गुरु राखै त्यों रहै, जो देवै सो खाय।।