Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #441

ज्ञान · Wisdom

द्वार थनी के पड़ि रहे, धका धनी का खाय। कबहुक धनी निवाजि है, जो दर छाड़ि न जाय।।