Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #491

अहंकार · Ego

आपा मेटे हरि मिले, हरि मेटे सब जाई। अकथ कहानी प्रेम की, कोई नहीं पतियाय।।