Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #502

गुरु · Guru

गुरु महिमा गावत सदा, मन राखे अति मोद। सो भव फिर आवै नहीं, बैठे प्रभु की गोद।।