Kabir Amritwani
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #527
गुरु · Guru
बिन सद्गुरु बाचै नहीं, फिर बूड़े भव मांहि। भौसागर की त्रास से, सतगुरु पकड़े बाहि।।
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