Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #531

गुरु · Guru

सतगुरु शरण न आवहीं, फिर‍ि फिरि होय अकाज। जीव खोय सब जायेंगे, काल तिहूं पुर राज।।