Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #543

गुरु · Guru

गुरु किया है देह का, सतगुरु चीन्‍हा नांहि। भवसागर के जाल में, फिर फिर गोता खांहि।।