Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #569

माया · Illusion

जो कामिनी पड़दै रहे, सुनै न गुरुमुख बात। सो तो होगी कूकरी, फिरै उघारै गात।।