Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #602
माया · Illusion
दुख सुख एक समान है, हरष शोक नहिं व्याप। उपकारी निहकामता, उपजै छोह न ताप।।
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