Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #605

ध्यान · Meditation

साधु भौंरा जग कली, निश दिन फिरै उदास। टुक टुक तहां बिलंबिया, जहं शीतल शब्‍द निवास।।