Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #652
गुरु · Guru
सो दिन गया अकाज में, संगत भई न संत। प्रेम बिना पशु जीवना, भाव बिना भटकंत।।
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