Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #659
आत्मचिंतन · Self-reflection
कवि तो कोटिक कोटि हैं, सिर के मूड़े कोट। मन के मूड़े देखि करि, ता संग लीजै ओट।।
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