Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #693

वैराग्य · Detachment

अनुराते सुखा सोवना, राते नींद न आय। ज्‍यों जल छुटी माछरी, तड़फत रैन बिहाय।।