Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #706
ध्यान · Meditation
निरबन्धन बंधा रहै, बंधा निरबंध होय। कर्म करै करता नहीं, दास कहावै सोय।।
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