Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #711

वैराग्य · Detachment

कबीर गुरु कै भावते, दूरहि ते दीसन्‍त। तन छीना मन अनमना, जग के खठि फिरन्‍त।।