Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #739

भक्ति · Devotion

भक्ति सोई जो भाव सों, इक मन चित को राख। सांच शील सो खेलिए, मैं तें दोऊ नाख।।