Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #816

भक्ति · Devotion

तू तू करता तू भया, तुझ में रहा समाय। तुझ मांहि मन मिलि रहा, अब कहुं अनत न जाय।।