Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #819

भक्ति · Devotion

प्रेम बिकाता मैं सुना, माथा साटै हाट। पूछत बिलम न कीजिये, तब छिन दीजै काट।।