Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #823

गुरु · Guru

प्रेम बिना धीरज नहीं, बिरह बिना वैराग। सतगुरु बिन जावै नहीं, मन मनसा का दाग।।