Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
आज का दोहा
प्रीमियम
लॉग इन / रजिस्टर
आज का दोहा
प्रीमियम
लॉग इन / रजिस्टर
Kabir Amritwani
कबीर दोहा #83
अहंकार · Ego
साधु रण में जूझकर, टूटन दे हंकार। जग की मरनी क्यों मरें, दिन में सौ-सौ बार।।
कॉपी
शेयर
WhatsApp