Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #901

मृत्यु · Mortality

काल चक्र चक्‍की चलै, बहुत दिवस औ रात। सगुन निगुन दोय पाटला, तामें जीव पिसात।।