Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

सभी दोहे

अर्थ सहित — खोजिए, सहेजिए और साझा कीजिए

गुरु · Guru

गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय। बलिहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो बताय॥

1
प्रेम · Love

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥

2
सत्य · Truth

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥

3

Lifetime Pro

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