Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर के करुणा पर दोहे

अर्थ सहित — खोजिए, सहेजिए और साझा कीजिए

करुणा · Compassion

मांस मांस सब एक है, मुरगी हिरनी गाय। आंखि देखि नर खात है, ते नर नरकहिं जाय॥

भावार्थ: कबीर दास जी कहते हैं कि चाहे वह मुर्गी हो, हिरण हो या गाय, सबका मांस एक समान है। मनुष्य अपनी आँखों से भेद करके केवल कुछ विशेष जीवों को ही भोजन के रूप में चुनता है और उन्हें खाता है। जो लोग इस अज्ञानता और क्रूरता में लिप्त होकर मांस का सेवन करते हैं, वे आध्यात्मिक पतन और दुखों के गर्त में गिरते हैं।

1
करुणा · Compassion

कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर। ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर॥

भावार्थ: कबीर कहते हैं कि वे इस संसार रूपी बाज़ार में तटस्थ खड़े हैं, जहाँ वे बिना किसी भेदभाव के सभी के कल्याण की कामना करते हैं। उनका दृष्टिकोण ऐसा है जहाँ न तो किसी के प्रति विशेष मोह (दोस्ती) है और न ही किसी के प्रति कोई द्वेष (दुश्मनी), बल्कि एक पूर्ण संतुलन है।

2
करुणा · Compassion

जहां दया वहां धर्म है, जहां लोभ तहं पाप। जहां क्रोध वहां काल है, जहां क्षमा वहां आप॥

भावार्थ: कबीर दास जी कहते हैं कि जिस हृदय में दया का वास होता है, वहीं वास्तविक धर्म निवास करता है। जहाँ लोभ और लालच होता है, वहाँ केवल पाप का जन्म होता है। क्रोध मनुष्य के लिए काल (मृत्यु) के समान विनाशकारी है, जबकि क्षमा और forgiving स्वभाव में स्वयं परमात्मा का वास होता है।

3

बाकी 44 दोहे Premium सदस्यों के लिए

इस श्रेणी के सभी 47 दोहे अर्थ सहित पढ़ने के लिए Lifetime Pro लें।

Premium में अपग्रेड करें

दोहा और हिंदी भावार्थ नि:शुल्क हैं। English translation, ईबुक, वॉलपेपर और पसंदीदा Lifetime Pro में मिलते हैं।

Lifetime Pro देखें