Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर के मृत्यु पर दोहे

अर्थ सहित — खोजिए, सहेजिए और साझा कीजिए

मृत्यु · Mortality

कबिरा यह तन जात है, सके तो ठौर लगा। कै सेवा कर साधु की, कै गोविंद गुन गा॥

भावार्थ: कबीर कहते हैं कि यह मानव शरीर नश्वर है और एक दिन निश्चित रूप से समाप्त हो जाएगा। यदि आप इस जीवन में कुछ सार्थक करना चाहते हैं, तो अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं। संतों की निस्वार्थ सेवा करें और उस निराकार ईश्वर (गोविंद) के गुणों का गान करें, क्योंकि यही वह एकमात्र निवेश है जो मृत्यु के पार भी साथ रहता है।

1
मृत्यु · Mortality

पत्ता बोला वृक्ष से, सुनो वृक्ष बनराय। अब के बिछुड़े ना मिले, दूर पड़ेंगे जाय॥

भावार्थ: एक पत्ता वृक्ष से कहता है कि हे वृक्ष, मेरी बात सुनो। अब जब हम एक बार अलग हुए, तो फिर कभी नहीं मिलेंगे, क्योंकि हम एक-दूसरे से बहुत दूर चले जाएंगे। यह दोहा जीवन की क्षणभंगुरता और विछोह की अपरिहार्यता को दर्शाता है।

2
मृत्यु · Mortality

एक दिन ऐसा होएगा, सब सूँ पड़े बिछोइ। राजा राणा छत्रपति, सावधान किन होइ।।

भावार्थ: कबीर दास जी चेतावनी देते हैं कि एक ऐसा समय आएगा जब मृत्यु या समय का प्रहार सबको समान रूप से अलग कर देगा। चाहे वह कोई शक्तिशाली राजा हो, कोई महान योद्धा हो या कोई छत्रपति, कोई भी इस अनिवार्य विछोह से बच नहीं पाएगा और न ही कोई अपनी सत्ता से खुद को बचा सकेगा।

3

बाकी 97 दोहे Premium सदस्यों के लिए

इस श्रेणी के सभी 100 दोहे अर्थ सहित पढ़ने के लिए Lifetime Pro लें।

Premium में अपग्रेड करें

दोहा और हिंदी भावार्थ नि:शुल्क हैं। English translation, ईबुक, वॉलपेपर और पसंदीदा Lifetime Pro में मिलते हैं।

Lifetime Pro देखें