Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर के सत्य पर दोहे

अर्थ सहित — खोजिए, सहेजिए और साझा कीजिए

सत्य · Truth

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥

भावार्थ: जब मैं संसार में बुराई खोजने निकला तो कोई बुरा न मिला। जब अपने मन में झाँका तो पाया कि मुझसे बुरा कोई नहीं।

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सत्य · Truth

कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर। ना काहू से दोस्ती, न काहू से बैर॥

भावार्थ: कबीर बाज़ार में खड़े होकर सबकी भलाई माँगते हैं — न किसी से विशेष मित्रता, न किसी से शत्रुता।

2
सत्य · Truth

हीरा परा बाजार में, रहा छार लपटाय। बहुतक मूरख चलि गए, पारखी लिया उठाय॥

भावार्थ: हीरा बाज़ार में धूल में पड़ा रहा। बहुत से मूर्ख उसे छोड़कर चले गए, पर पारखी ने पहचानकर उठा लिया।

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