Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर के समय पर दोहे

अर्थ सहित — खोजिए, सहेजिए और साझा कीजिए

समय · Time

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब। पल में परलय होयगी, बहुरि करेगा कब॥

भावार्थ: जो कल करना है वह आज कर लो और जो आज करना है वह अभी कर लो। पल भर में प्रलय हो सकती है, फिर कब करोगे?

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समय · Time

धीरे धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय॥

भावार्थ: हे मन! धीरज रख, सब कुछ धीरे-धीरे ही होता है। माली चाहे सौ घड़े पानी डाले, फल ऋतु आने पर ही लगेगा।

2
समय · Time

मलिन आवत देख के, कलियन करी पुकार। फूले फूले चुन लिए, काल्ह हमारी बार॥

भावार्थ: माली को आते देख कलियाँ पुकार उठीं — आज खिले हुए फूल चुन लिए गए, कल हमारी बारी है।

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